बच्चों की लंबाई को लेकर अकसर उनके माता पिता परेशान रहते हैं. हर मां बाप की ये शिकायत रहती है की उनके बच्चे की लंबाई नहीं बढ़ रही है. अच्छी हाइट ना सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि अच्छी पर्सनालिटी को भी दर्शाती है. लेकिन क्या हो अगर हम आपको बताएं की भारत में उम्र के मुताबिक बच्चों की लंबाई कम है. यहां का औसतन हर चौथा बच्चा नाटेपन का शिकार है यही नहीं बच्चों का वजन भी मानक से कम है.
Growth failure से पीड़ित है 27 फीसदी बच्चे
हर मां बाप अपने बच्चे के लिए सबसे बेस्ट चीज ही चाहते हैं. अपने बच्चों की हाइट के लिए सारे मां बाप हर वो काम करते हैं जिससे उनके बच्चे का कद बढ़ जाए. पर अगर हम आपसे कहें की उत्तराखंड में 27 फिसदी बच्चे ग्रोथ फेलियर से पीड़ित हैं.
हाल ही में हिन्दुस्ताम अखबार में एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें कहा गया था की उत्तराखंड में 27 फीसदी बच्चे ग्रोथ फेलियर से पीड़ित है और उम्र के मुताबिक बच्चों की लंबाई और वजन भी नहीं बढ़ रहा है.
जानें क्यों होती है पहाड़ियों की हाइट कम
वैसे तो उत्तराखंड में बच्चों की हाइट कम होना बेहद आम बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन का अमाऊंट कम होता है. जो किसी भी इंसान के शरीर में खाने के एनर्जी में तबदील होने की कैपेसिटी को कम कर देता है. जिस वजह से हमारी बॉडी के डेवलपमेंट के लिए कम एनर्जी बनती है और जितनी एनर्जी हमारी बॉडी बनाती है उससे सबसे पहले हमारी बॉडी के और पार्टस डेवलप होते हैं. इस कारण पहाड़ों में रहने वाले लोगों की हाइट कम रह जाती है.
कुपोषण भी है कारण
लेकिन इस रिपोर्ट की मानें तो उत्तराखंड में पांच साल तक के 27 प्रतिशत बच्चों के अंदर कुपोषण की वजह से ग्रोथ फेलियर है. आईडीएस के उपनिदेशक विक्रम सिंह के मुताबिक वंशानुगत कारकों के अलावा कुपोषण भी कम हाइट का कारण है.
अब पहले जान लेते हैं क्या है कुपोषण
दो तरह के होते हैं कुपोषण
कुपोषण दो तरह का होता है…. कम पोषण या ज्यादा पोषण। अगर बच्चों को नियमित और संतुलित आहार नहीं मिल पाता तो बच्चे का शरीर कमजोर हो जाता है और बीमारियों से लड़ नहीं पाता तो ऐसे बच्चों का वजन धिरे धिरे कम होने लगता है और उनकी हाइट भी नहीं बढ़ पाती. वहीं दूसरी ओर गलत खानपान की आदत. खाने में जरूरी पोषक तत्वों के ना होने से भी ये समस्या होती है. कहीं आपका बच्चा कुपोषीत तो नहीं बच्चों को अगर संतुलित आहार नहीं मिले तो कुपोषण के कुछ लक्षण उनमें दिखाई देने लगते हैं.
कुपोषण के लक्षण
शरीर की वृद्धि रुक जाना
मांसपेशियाँ ढीली होना
झुर्रियाँ युक्त पीले रंग की त्वचा
जल्दी थकान लग जाना
चिड़चिड़ापन और घबराहट
बाल रूखे और चमक रहित होना
शरीर का वजन कम होना
हाथ पैर पतले और पेट बढ़ा होना या शरीर में सूजन आना
कुपोषण की वजह से बच्चों में सबसे ज्यादा समस्याएं पैदा होती हैं. क्योंकि उस समय उनका शारीरिक और मानसिक विकास दोनों हो रहे होते हैं. कुपोषण की चपेट में आने के 15-20 दिन में ही बच्चों के अंदर कुपोषण के लक्षण दिखने लगते हैं. लंबे समय तक बीमारियों वाले बच्चों को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है. इसमें छह महीने तक केवल मां का दूध इसके बाद पौष्टिक आहार बचाव है.
इस वजह से होते हैं बच्चे कुपोषित
बच्चों के अंदर कुपोषण खान-पान में गड़बड़ी की वजह से होता है. लंबे समय तक सही डाइट न मिलने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ गरीब लोगों में ही कुपोषण की समस्या होती है. कई बार आम घरों के बच्चों में भी बैलेंस डाइट नहीं मिलने की वजह से कुपोषण पैदा हो जाता है. ऐसे में ये फर्ज माता पिता का है की वो अपने बच्चों की अच्छी डाइट का पूरी तरह से ख्याल रखे और ये चेक करते रहे की कही आपके बच्चे के अंदर तो कुपोषण के कोई लक्षण नहीं.
