तीन महीने से लगातार MANIPUR VIOLENCE की आग मे जल रहा है। इसी बीच महिलाओं को नग्न कर घुमाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने घटना पर संज्ञान लिया है और सुनवाई की तारिख 28 जुलाई तय की है। वहीं मामले को लेकर मणिपुर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त
सुप्रीम कोर्ट का कड़े शब्दों में कहना है कि सरकार कड़ी करवाई करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटना बिलकुल अस्वीकार्य है और ये बेहद दुखद भी है। कोर्ट ने इसे संविधान और मानवाधिकारों का उलंघन बताया है। वायरल वीडियो को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का भी बयान आया है।
MANIPUR VIOLENCE पर पीएम मोदी ने तोड़ी चुप्पी
मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने वाले वीडियो पर पीएम ने चुप्पी तोड़ी है। पीएम मोदी ने कहा ‘मेरा हृदय पीड़ा से भरा है, क्रोध से भरा है। मणिपुर की जो घटना सामने आई है, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना है।’
आगे पीएम मोदी ने कहा कि ‘पाप करने वाले, गुनाह करने वाले, कितने हैं, कौन हैं, यह अपनी जगह है, लेकिन बेइज्जती पूरे देश की हो रही है। ‘140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ रहा है। सभी मुख्यमंत्रियों से आग्रह करता हूं कि वे माताओं-बहनों की रक्षा करने के लिए कठोर से कठोर कदम उठाएं।’
स्मृति ईरानी ने की घटना की निंदा
वहीं मणिपुर हिंसा पर केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी की प्रतिक्रिया भी सामने आयी है। मंत्री ईरानी ने घटना की निंदा की है और इसे पूरी तरह से अमानवीय बताया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया आई सामने
विपक्षी दल कांग्रेस की भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। वायरल वीडियो को लेकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा मणिपुर से आ रही महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। महिलाओं के साथ घटी इस भयावह हिंसा की घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा समाज में हिंसा का सबसे ज्यादा दंश महिलाओं और बच्चों को झेलना पड़ता है।
पुलिस ने किया एक आरोपी को गिरफ्तार
बताया जा रहा है कि ये वीडियो चार मई का है। वहीं पुलिस का कहना है कि इस मामले को लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मणिपुर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जानें मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा ?
मणिपुर की राजधानी इम्फाल बिल्कुल बीच में है। ये पूरे मणिपुर का 10 प्रतिशत हिस्सा है। जिसमे प्रदेश की 57 प्रतिशत आबादी रहती है। बाकी चारों तरफ 90 प्रतिशत हिस्से मे पहाड़ी इलाके हैं, जहां प्रदेश की 43 प्रतिशत आबादी रहती है। इम्फाल घाटी वाले इलाके में मैतेई समुदाय का आबादी ज्यादा है। ये ज्यादातार हिंदू होते है। मणिपुर की कुल आबादी में इनकी हिस्सेदारी करीब करीब 53 प्रतिशत है।
दूसरी ओर पहाड़ी इलाकों में 33 मान्यता प्राप्त जनजातियां मुख्य रूप से ईसाई हैं। बताते चले कि मणिपुर का पहाड़ी जनजातियों को विशेष दर्जा और सुविधाएं मिली हुई है, जो मैतेई समुदाय को नही मिलती। ‘लैंड रिफॉर्म एक्ट’ के कारण मैतेई समुदाय पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीदकर बस नहीं सकता। जबकि जनजातियों पर पहाड़ी इलाके से घाटी में आकर बसने पर कोई रोक नहीं है। यही वजह है कि दोनों समुदायों में मतभेद बढ़ा हुआ है।
जानें कब हुई हिंसा की शुरूआत ?
दरअसल इसकी शुरुआत मणिपुर के चुराचंदपुर से हुई। ये राजधानी इम्फाल के दक्षिण में करीब 63 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस जिले में कुकी आदिवासी ज्यादा है। गवर्नमेंट लैंड सर्वे के विरोध में 28 अप्रैल को द इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने चुराचंदपुर में 8 घंटे बंद का ऐलान किया था। और देखते ही देखते इस बंद ने हिंसक रूप ले लिया।
