उत्तराखंड में लगातार धधक रहे जंगल, ये आंकड़ें देखकर चौंक जाएंगे आप

प्रदेश में लगातार जंगलों के जलने की खबरें सामने आ रही हैं। अगर हम आपसे सिर्फ बीते मंगलवार की बात करें तो उत्तराखंड में मंगलवार के दिन छियालीस जगहों से वनाग्नि की खबरें सामने आयी जिनमें से 20 खबरें गढ़वाल और 24 कुमाऊं की थी।

उत्तराखंड में लगातार धधक रहे जंगल

आप ये जानकर चौंक जाएंगे की उत्तराखंड में साल 2010 में, 1.15 मिलियन हेक्टेयर प्राकृतिक वन थे, जो इसके क्षेत्र के 32% से ज्यादा तक फैले हुए थे। लेकिन वहीं साल 2023 में, उत्तराखंड ने अपने नौं सौ इकहत्तर हेक्टेयर प्राकृतिक जंगल खो दिये। आपको बता दें की प्रदेश में 1 नवंबर, 2023 से लेकर 23 अप्रैल 2024 तक वनाग्नि की कुल चार सौ सतहत्तर घटनाएं सामने आयीं जिनमें 570.07 हेक्टेयर जंगल खाक हो गए हैं।

जंगलों में आग क्यों लगती है ?

आग को जलने के लिए तीन चीजों की जरुरत होती है पहला ईंधन, दुसरा ऑक्सीजन और तीसरा हीट। अब ऑक्सीजन की बात की जाए तो हमारे जंगलों में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं होती इसके अलावा यहां पेड़ों के सूखे पत्ते और टहनियां ईंधन का सबसे सोर्स होती हैं अब बची हीट तो वो गर्मी के मौसम में पैदा हो ही जाती है लेकिन अगर आप सोच रहे हैं की गर्मी का मौसम ही जंगल में आग लगने का कारण है तो जरा रुक जाइए। हम जानते हैं जंगलों में आग लगने के लिए एक छोटी सी चिंगारी भी काफी है लेकिन ये चिंगारी सिर्फ पेड़ों की टहनियों के आपस में रगड़ खाने और सूरज की तेज़ किरणों के अलावा भी कई और तरीकों से लगती है और ज्यादातर इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ इंसानों का होता है।

मानव इन कारणों से लगाते हैं आग

  • शहद या साल के बीज जैसे उत्पादों को इकट्ठा करने के लिये लोग जानबूझकर जंगल में आग लगाते हैं।
  • किसी जलती चीज़ को लोग जंगल में ऐसे ही छोड़ देते हैं।
  • आस-पास के गाँव के लोगों द्वारा दुर्भावना से भी लोग आग लगाते हैं।
  • मवेशियों के लिये चारा उपलब्ध कराने के साथ साथ बिजली के तारों का जंगलों से होकर गुजरना भी आग का सबसे बड़ा कारण है।

जैव विविधता भी होती है प्रभावित

इस आग से प्रदूषण तो होता ही है लेकिन साथ ही में जैव विविधता को काफी नुकसान भी होता है। वनाग्नि से मिट्टी की उर्वरता में भी काफी कमी आती है इससे जंगल में पेड़ तो जलते ही हैं वहीं नए पेड़ भी नहीं उग पाते।

क्या कहते हैं आंकड़े?

Global forest watch की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में पिछले 4 हफ्तों में, चंपावत 11 फायर अलर्ट के साथ सबसे ज्याद सेंसटीव ऐरीया रहा। बात की जाए पिछले तीन साल की तो 26 अप्रैल 2021 से 22 अप्रैल 2024 के बीच उत्तराखंड में कुल 1,125 वनाग्नि के अलर्ट आए। इस हफ्ते की बात करें तो हमें बीते 7 दिनों में 2,411 आग अलर्ट की सूचना मिली, जिनमें से 1.7% high confidence alerts थे।

Forest fire