विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से निकाले गए पूर्व वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत अब एक नई मुसीबत में फंस गए हैं। जी हां आपको बताते चले मामला कॉर्बेट नेशनल पार्क के तहत पाखरो टाइगर सफारी के निर्माण से जुड़ा है। इस दौरान अवैध रूप से हजारों पेड़ काटे गए थे, पार्क क्षेत्र में कंक्रीट निर्माण किए गए। पाखरो और मोरघट्टी में हुए अवैध निर्माण मामले में सुप्रीम कोर्ट की सेंटर इंपावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी है। सीईसी ने साल 2021 में हुए अवैध कार्यों के लिए तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी डीएफओ किशन चंद को दोषी बताया है। अधिवक्ता गौरव कुमार की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में सेंटर एंपावर्ड कमेटी ने किशन चंद द्वारा किए गए अवैध निर्माण और कथित गड़बड़ियों के लिए हरक सिंह रावत को जिम्मेदार मानते हुए उन को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी करने की सिफारिश की है। बता दें कि गड़बड़ियों के आरोप में वन क्षेत्र के रेंजर बृजबिहारी शर्मा और तत्कालीन डीएफओ किशन चंद पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। अब पहली बार इस मामले में तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत का नाम सामने आया है। सीईसी ने मामले में यह भी पाया कि डॉ. हरक सिंह रावत ने मंत्री रहते हुए तत्कालीन डीएफओ किशन चंद को नियमों के विपरीत संरक्षण दिया।
